नेशनल लोक अदालत में 1521 लंबित प्रकरणों एवं 219 प्रिलिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया गया

रघुनंदन समाधिया : प्रधान संपादक : मां भगवती टाइम्स

 


’’नेशनल लोक अदालत एक ऐसा यज्ञ है, जिसमें न्यायाधीशगण एवं अधिवक्तागण अपने श्रम, समय एवं अनुभव की आहुति देकर समाज में न्याय एवं सौहार्द की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

देवास। ”राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण देवास श्री कपिल मेहता के मार्गदर्शन में दिनांक 12 सितंबर 2026 शनिवार को जिले के समस्त न्यायालयों में वृहद स्तर पर इस वर्ष की तृतीय ’नेशनल लोक अदालत’ का आयोजन किया गया। 

श्री कपिल मेहता प्रधान जिला न्यायाधीश द्वारा दीप प्रज्जवलित कर नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ करते हुए सभागार में उपस्थित न्यायिक अधिकारीगण, प्रशासनिक अधिकारीगण, अधिवक्तागण, पैरालीगल वालेंटियर्स एवं पक्षकारगण को संबोधित करते हुए माननीय श्री कपिल मेहता साहब ने कहा कि लोक अदालत केवल लंबित प्रकरणों के निराकरण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह पक्षकारों के मध्य आपसी सौहार्द, सहयोग एवं सामाजिक समरसता स्थापित करने का प्रभावी मंच भी है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत की सफलता में न्यायाधीश एवं अधिवक्ता दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। न्यायालयीन प्रक्रिया के माध्यम से जहाँ न्याय प्रदान किया जाता है, वहीं लोक अदालत के माध्यम से आपसी सहमति एवं समझौते के आधार पर विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान किया जाता है। उन्होंने लोक अदालत को सफल बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों, न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं एवं पक्षकारों से अधिकाधिक प्रकरणों का आपसी सहमति से निराकरण किए जाने का आह्वान किया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देवास के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में परिवार न्यायालय, देवास ने विशेष एवं उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश श्री जितेन्द्र सिंह कुशवाह द्वारा एकल बैठक में कुल  93 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निराकरण किया गया। इनमें विशेष रूप से 30 दंपतियों के पारिवारिक विवादों का आपसी सहमति एवं समझाइश के माध्यम से निराकरण किया गया। लोक अदालत के माध्यम से विवाद समाप्त होने के पश्चात ये 30 जोड़े सहर्ष, उल्लास एवं प्रसन्नता के वातावरण में ढोल-नगाड़ों के साथ अपने-अपने घरों के लिए रवाना हुए। यह दृश्य न केवल न्यायालय परिसर के लिए भावुक एवं सुखद क्षण रहा, बल्कि लोक अदालत की मूल भावनाकृ“विवाद का अंत, संबंधों की पुनः शुरुआत”को भी साकार करता हुआ दिखाई दिया।


   उल्लेखनीय है कि पारिवारिक विवादों का निराकरण अत्यंत संवेदनशील एवं चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया होती है। पारिवारिक मामलों में केवल विधिक पक्ष ही महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि पक्षकारों की भावनाओं, पारिवारिक परिस्थितियों एवं आपसी संबंधों को ध्यान में रखते हुए समाधान की दिशा में प्रयास करना भी आवश्यक होता है। ऐसे मामलों में पक्षकारों के मध्य आपसी सहमति स्थापित करना एक जटिल कार्य होता है।



    न्यायालय परिसर में कई बार पक्षकारों अथवा अन्य व्यक्तियों की अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की आवश्यकता महसूस होती थी। ऐसी आपातकालीन परिस्थितियों में समय की महत्ता को देखते हुए न्यायिक परिवार एवं अधिवक्ता समुदाय ने आपसी सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए अपने-अपने स्तर पर अंशदान कर एंबुलेंस उपलब्ध कराने का निर्णय लिया।  न्यायालय परिसर में आने वाले पक्षकारों, अधिवक्ताओं, कर्मचारियों एवं आम नागरिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक सराहनीय एवं मानवीय पहल की गई है। माननीय न्यायाधीशगण, न्यायालयीन कर्मचारी एवं अधिवक्ताओं के सामूहिक आर्थिक सहयोग (जनसहयोग) से न्यायालय परिसर के लिए एक समर्पित एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है जिसके लिए माननीय न्यायाधीशगण द्वारा राशि रू 51000/-कर्मचारीगण द्वारा 24100/- रू. का सहयोग रहा।  

   न्यायालय परिसर में उपलब्ध इस एंबुलेंस के माध्यम से किसी भी आकस्मिक स्वास्थ्य संबंधी स्थिति में जरूरतमंद व्यक्ति को बिना अनावश्यक विलंब के निकटतम अस्पताल तक पहुंचाया जा सकेगा। एंबुलेंस में प्राथमिक उपचार एवं आवश्यक आपातकालीन चिकित्सा उपकरणों की व्यवस्था की गई है। यह सेवा न्यायालय परिसर में आने वाले पक्षकारों, आम नागरिकों, अधिवक्ताओं एवं न्यायालयीन कर्मचारियों के लिए निःशुल्क उपलब्ध रहेगी। एंबुलेंस सेवा के शुभारंभ अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि न्यायालय का दायित्व केवल न्याय प्रदान करना ही नहीं, बल्कि जरूरत के समय मानवीय संवेदनाओं के साथ समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी है। न्यायाधीशों, कर्मचारियों एवं अधिवक्ताओं के सामूहिक सहयोग से शुरू की गई यह सेवा इसी भावना का प्रतीक है।


  नेशनल लोक अदालत में सिविल, आपराधिक, विद्युत अधिनियम, एनआईएक्ट, चैक बाउन्स, श्रम मामले, मोटर दुर्घटना दावा, बीएसएनएल आदि विषयक प्रकरणों के निराकरण हेतु जिला मुख्यालय देवास एवं तहसील स्तर पर सोनकच्छ, कन्नौद, खातेगांव, टोंकखुर्द एवं बागली में 35 न्यायिक खंडपीठों का गठन किया गया। 

श्री कपिल मेहता, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा विद्युत कंपनी, नगर निगम, बैंक, बीएसएनएल एवं बीमा कंपनियों सहित विभिन्न विभागों एवं संस्थाओं द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया गया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर लोक अदालत में अधिकाधिक प्रकरणों का आपसी सहमति एवं राजीनामे के आधार पर निराकरण सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश एवं प्रोत्साहन प्रदान किया, उन्होंने विभिन्न न्यायिक खंडपीठों का भ्रमण कर कार्यवाही का अवलोकन किया तथा न्यायिक अधिकारियों एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों को लोक अदालत की भावना के अनुरूप अधिक से अधिक प्रकरणों के निराकरण के लिए प्रेरित किया।

शुभारंभ कार्यक्रम में श्री ऋतुराज सिंह, कलेक्टर एवं जिलादंडाधिकारी, श्री जितेन्द्र सिंह कुशवाह, प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय, श्री उमाशंकर अग्रवाल प्रथम जिला न्यायाधीश, द्वितीय जिला न्यायाधीश नरेन्द्र पटेल, श्री प्रसन्न सिंह बहरावत चतुर्थ जिला न्यायाधीश, डाॅ. रविकांत सोलंकी अतिरिक्त जिला न्यायाधीश, श्री भारत सिंह कनेल मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, श्री रोहित श्रीवास्तव सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं अन्य न्यायाधीशगण श्रीमती साक्षी कपूर, श्रीमती पूर्णिमा कोठे राजन, श्रीमती दीक्षा मौर्य, श्री कुंवर युवराज सिंह, श्री अभिजीत सिंह, श्रीमती किरण सिंह, सुश्री नेहा उपाध्याय, श्रीमती रश्मि अभिजीत मरावी, सुश्री मोनिता वानखेड़े, सुश्री चंद्रा पवार, सुश्री मुस्कान अरोरा, श्री दिलीप मुझाल्दा, जिला विधिक सहायता अधिकारी, श्री राम प्रसाद सूर्यवंशी, अध्यक्ष अधिवक्ता संघ, श्री चंद्रपाल सिंह सोलंकी, सचिव अधिवक्ता संघ, श्रीमती आरती खेडेकर, उपायुक्त नगर निगम, विद्युत कंपनी एवं बैंक के अधिकारीगण, लीगल एड डिफेंस काउंसेल स्टाॅफ, लोक अभियोजन अधिकारीगण, अधिवक्तागण, पैरालीगल वालेंटियर्स एवं पक्षकारगण उपस्थित रहे उक्त कार्यक्रम का संचालन श्री अभिषेक गौड, के द्वारा किया गया तथा आभार श्री निलेन्द्र कुमार तिवारी द्वारा व्यक्त किया गया। 

नेशनल लोक अदालत में निराकृत प्रकरणों की जानकारीः-

देवास जिले में आयोजित नेशनल लोक अदालत में 1521 लंबित प्रकरणों का निराकरण हुआ है। संपूर्ण जिले में गठित 35 न्यायिक खंडपीठों में न्यायालयों के लंबित प्रकरणों में आपराधिक प्रकरण 614, मोटर दुुर्घटना के 46, चैक बाउन्स 210, फैमेली मेटर्स 51, विद्युत के 201, श्रम के 11, ट्रेफिक चालान 175, विविध के 184 , सिविल के 27, बैंक रिकवरी 01, कुल  1521 प्रकरण निराकृत हुए जिसमें राशि रू. 525521632/-के अवार्ड की गई।  

निराकृत 1521 प्रकरणों में राशि रू 524041071/- के अवार्ड आपसी समझौते के आधार पर पारित किए गए। नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट के 210 प्रकरण निराकृत हुए जिनमें  47982929/-  रूपये के चैकों की राशि में सेटलमेंट किया गया। 

219 प्रिलिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया गया है जिसमें रूपये 1480561/-रू. राशि के अवार्ड पारित किए गए है।  


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